जानें क्या है? मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) विधेयक 2019

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लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी मानव अधिकार संरक्षण संशोधन विधेयक 2019 पारित हो गया है। सरकार का मानना है कि इस संशोधन से क्षमता और बहुलता में वृद्धि होगी तथा आयोग और साथ ही राज्य आयोगों को भी, उनकी स्वायत्तता, स्वतंत्रता, बहुवाद और मानव अधिकारों के प्रभावी संरक्षण तथा उनका संवर्धन करने हेतु बल मिलेगा।

विधेयक की मुख्य बातें…

नए विधेयक के मुताबिक, देश के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश को आयोग का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। पहले सिर्फ मुख्य न्यायाधीश ही इस पद पर रह सकता है।

आयोग के सदस्यों की संख्या दो से बढ़ाकर 3 किया जाएगा। जिसमें एक महिला भी होगी।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष और दिव्यांगजनों सम्बन्धी मुख्य आयुक्त को आयोग के सदस्यों के रूप में सम्मिलित किया जा सकेगा।

आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल 5 साल से घटाकर 3 साल कर दिया जाएगा। इसके साथ ही वह एक से अधिक बार इस पद पर रह सकेंगे।

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